#चलो_अंदोसर
सनातन धर्म व संस्कृति में शिवालय का महत्वपूर्ण स्थान है, शिवालय सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग हैं।शिव का सानिध्य प्रदान करने वाले शिवालय एक ओर जहां सनातन धर्मी के ह्रदय को आनंद प्रदान करते हैं ;वहीं दुख के क्षण में मन को शांति प्रदान करते हैं। यहां प्रतिदिन संपादित होने वाली प्रभु सेवा, पूजा व आरती से भक्तों में एक नवीन ऊर्जा का संचार होता है। जीवन को एक नवीन ऊर्जा मिलती है। शिवालय में शिवलिंग के दर्शन मात्र से नकारात्मकता सकारात्मकता में परिणत होकर मानव को सृजनात्मक जीवन की ओर अग्रसर करती है।त्रिदेवों में एक, देवों के देव महादेव, महाकाल के काल भगवान शिव के शिवलिंग की पूजा अनंतकाल से की जा रही है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ; सनातन धर्म के सर्वाधिक लोकप्रिय अमृत ग्रंथ '' श्री राम चरित मानस '' में भगवान शिव को गुरू रूप में वर्णित किया गया है - वन्दे बोधमयं नित्यं गुरु , शंकर रूपिणम | यमाश्रितो हि वक्रोपि , चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते||" - इस श्लोक में शिव जी को गुरु रूप में प्रणाम करके उनकी महिमा बताई गई है। विद्वानों का मत है कि शिवालय सहित सभी मंदिरों का निर्मा...

Comments
Post a Comment