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Showing posts from May, 2023

आरती

 भगवान शिव जी की आरती जय शिव ओंकारा ॐ जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव...॥ एकानन चतुरानन पंचानन राजे । हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव...॥ दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे। त्रिगुण रूपनिरखता त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव...॥ अक्षमाला बनमाला रुण्डमाला धारी । चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव...॥ श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे । सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव...॥ कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता । जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता ॥ ॐ जय शिव...॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका । प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव...॥ काशी में विश्वनाथ विराजत नन्दी ब्रह्मचारी । नित उठि भोग लगावत महिमा अति भारी ॥ ॐ जय शिव...॥ त्रिगुण शिवजीकी आरती जो कोई नर गावे । कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे ॥ ॐ जय शिव...॥ जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा| ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥

#चलो_अंदोसर

 सनातन धर्म व संस्कृति  में शिवालय का महत्वपूर्ण स्थान है, शिवालय सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग हैं।शिव का सानिध्य प्रदान करने वाले शिवालय एक ओर जहां सनातन धर्मी के ह्रदय को आनंद प्रदान करते हैं ;वहीं दुख के क्षण में मन को शांति प्रदान करते हैं। यहां प्रतिदिन संपादित होने वाली प्रभु सेवा, पूजा व आरती से भक्तों में एक नवीन ऊर्जा का संचार होता है। जीवन को एक नवीन ऊर्जा मिलती है। शिवालय में शिवलिंग के दर्शन मात्र से नकारात्मकता सकारात्मकता में परिणत होकर मानव को सृजनात्मक जीवन की ओर अग्रसर करती है।त्रिदेवों में एक, देवों के देव महादेव, महाकाल के काल भगवान शिव के शिवलिंग की पूजा अनंतकाल से की जा रही है।  गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ; सनातन धर्म के सर्वाधिक लोकप्रिय अमृत ग्रंथ '' श्री राम चरित मानस '' में भगवान शिव को गुरू रूप में वर्णित किया गया है - वन्दे बोधमयं नित्यं गुरु , शंकर रूपिणम |  यमाश्रितो हि वक्रोपि , चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते||" - इस श्लोक में शिव जी को गुरु रूप में प्रणाम करके उनकी महिमा बताई गई है। विद्वानों का मत है कि शिवालय सहित सभी मंदिरों का निर्मा...

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मुख्य पुजारी

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श्रावण मास क्यों प्रिय है शिव को?

आचार्य प्रमोद मिश्रा  बताते हैं कि भगवान शिव को श्रावण मास  इतना ज्यादा क्यों प्रिय है -  श्रावण मास वर्षा एवं हरियाली का समय होता है और यह अति मनमोहक समय होता है. श्रावण मास का प्रत्येक दिन महत्वपूर्ण है, लेकिन श्रावण मास में सोमवार का विशेष फल है. श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ का पूजन-अर्चन करने तथा जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, जप इत्यादि का विशेष फल है. कहा जाता है कि इस महीने में भगवान भोलेनाथ की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस श्रावण मास में रामचरित मानस एवं राम नाम संकिर्तन का विशेष महत्व है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण के महीने में माता पार्वती ने तपस्या करके भोलेनाथ को प्रसन्न किया था और उन्हें पति रूप में प्राप्त किया था. इसलिए भी भगवान भोले नाथ को यह मास अत्यधिक प्रिय है.